Shri Khatu Shyam Ji Aarti

1445418493.png

Shri Khatu Shyam ji Aarti Om jai shree shyam hare, baba jai shree shyam hare Khatu dham birajat, anupam roop dhare, om jai shree shyam hare… Ratan jadit singhasan, sar per chanvar dhule Tan kehariya bago, kundal shravan pade, om jai shree shyam hare… Gal pushpon ki maala, sir per mukut dhare Khevat dhoop, agni par, deepak jyoti jale, om jai shree shyam hare… Modak, kheer, choorma, suvaran thaal bhare, Seval bhog lagavat, seva nitya kare, om jai shree shyam hare… Jhanj, katora aur ghadiyaval, shankh mridang ghure, Bhakt Aarti gaave, jai jai kaar kare, om jai shree shyam hare… Jo dhyave fal paave, sab dukh se ubre, Sevak jan nij mukhse, shree shyam shyam uchre, om jai shree shyam hare… Shree shyam bihariji ki Aarti, jo koi nar gaave Kehat sudhir agyaani, manvanchit fal paave, om jai shree shyam hare… Om jai shree shyam hare, baba jai shree shyam hare, Nij bhaktom ke tumne, pooran kaaj kare, om jai shree shyam hare…

Khatu Shyam baba Famous भजन

भजन

https://www.youtube.com/watch?v=w-70yLgC-jM कीर्तन की है रात बाबा , आज थाने आणो है थाने कौल निभाणो है ।।
https://www.youtube.com/watch?v=cqq4aYVhU2A कोर्इ प्यार से मेरे श्याम को सजाले, गजब हो जायेगा।
https://www.youtube.com/watch?v=KbFrQlQuO4Y ऐसा तो हमारा बाबा है बाबा तो हमारा है
https://www.youtube.com/watch?v=MSAYmV7qWtI हुआ धन्य मेरा जीवन, तेरा प्यार जो मिला है
https://www.youtube.com/watch?v=yqnfiyzBl7g पलकें ही पलकें बिछायेंगे, जिस दिन श्याम प्यारे घर आयेंगे
https://www.youtube.com/watch?v=hiQl4xS0l-0 देना है तो दीजिऐ जन्म-2 का साथ
https://www.youtube.com/watch?v=Tn9rdzaDGTI भर दे रे श्याम झोली भरदे-भरदेना बहलाओ
https://www.youtube.com/watch?v=giBIDIZosvI किस्मत वालों को मिलता है, श्याम तेरा दरबार सच्ची सरकार तुम्हारी
https://www.youtube.com/watch?v=4XyaEkHhSjA दुनिया चले ना श्रीराम के बिना, रामजी चले ना हनुमान के बिना।
https://www.youtube.com/watch?v=fYyLnYyE2R0 मेरे दुख के दिनों में, वो बड़े काम आते हैं
https://www.youtube.com/watch?v=iz_jWTeJ8IE ऐसी मस्ती कहां मिलेगी, श्याम नाम रस पी ले तूं मस्ती में जी ले
https://www.youtube.com/watch?v=H0TyoW01m1o मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है। करते हो तुम कन्हैया मेरा नाम हो रहा है।।
https://www.youtube.com/watch?v=sNrHFCHXErw ओ मेरे प्रभु, ओ मेरे प्रभु, दुनिया के पालनहार हो तुम
https://www.youtube.com/watch?v=FLJQldtXwjk श्याम तेरी तस्वीर सिरहाने रखकर सोते हैं
https://www.youtube.com/watch?v=K-1DNlR9RoM किसने सजाया खाटू वाले़ को
https://www.youtube.com/watch?v=U0SWvIDK_0w संसार को जीभर देख लिया अब तुमको जीभर देखेंगे।
https://www.youtube.com/watch?v=nYmH6rjvQsg ऐसा बना दे मुझे श्याम दीवाना
https://www.youtube.com/watch?v=yexSn8Hsqbk दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
https://www.youtube.com/watch?v=3WjYJLqw258 देता हर दम सांवरे तू हारे का साथ
https://www.youtube.com/watch?v=8RDFCoI5GE4 तेरे हर दुख में हर सुख में यही काम आएगा रिश्ता तो बना ले श्याम से आराम पाएगा
https://www.youtube.com/watch?v=1Wuxlzqp8p0 दिल की पतंग में सांवरे डाल दे अपनी डोर
https://www.youtube.com/watch?v=T7ffhLXhU8w आज तेरी कल मेरी बारी आएगी सांवरिए की सबको कृपा मिल जाएगी
https://www.youtube.com/watch?v=_RP_A8JLmys आ गया खाटू वाला
https://www.youtube.com/watch?v=myfl3l9Rkho थाली भरकर ल्याइै रै खीचड़ौ, उळपर घी की बाटकी
https://www.youtube.com/watch?v=mGGm_I8aBmA मोरछड़ी लहरार्इ रे रसिया ओ सांवरा तेरी बहुत बड़ी सकलार्इ रे।
https://www.youtube.com/watch?v=rSFQAICEXMI तेरे चरणों के काबिल अगर हम नहीं। हमको काबिल बनाना तेरा काम है।।
https://www.youtube.com/watch?v=YExIcU-6s4M हाथ में तेरे सौंप दी हमने अपने जीवन की डोर।सुनो ना सांवरिया, सुनो ना मेरे सांवरिया।।
https://www.youtube.com/watch?v=UKQ9gXuyDTE पकड़ लो हाथ बनवारी नहीं तो डूब जाएंगे।
https://www.youtube.com/watch?v=YddDUpYDNWA सेवा भक्ति कर नहीं पाया किस्मत का हूं मारा। तेरे प्रेमी के घर में मुझे देना जन्म दुबारा।।

आरती

कपूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम।
सदाबसन्तं हृदयार वन्दे, भवंभवानी सहितं नमामि।।

 

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटूधाम विराजत, अनुपम रूप धरे।। ॐ जय ….
रतन जडि़त सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे।
तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े।। ॐ जय ….
गल पुष्पों की माला, सिर पर मुकुट धरे।
खेवत धूप अगिन पर, दीपक ज्योति जले।। ॐ जय ….
मोदक खीर, चूरमा, सुवरण थाल भरे।
सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करें।। ॐ जय ….
झांझ कटोरा और घडि़याल, शंख मृदंग धुरे।
भक्त आरती गावें, जय जयकार करें।। ॐ जय ….
जो ध्यावे फल पावे, सब दुख से उबरे।
सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे।। ॐ जय ….
श्री श्याम बिहारी जी की आरती जो कोर्इ नर गावे।
कहत आलू सिंह स्वामी, मनवांछित फल पावे।। ॐ जय ….
जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे।। ॐ जय ….

भगवान कृष्ण के १०८ नाम

db9be5081f88541becb7dcec2314dd082044273555036910774.jpg

अचल : स्थायी, स्थिर, निरंतर मनोहर : मनमोहक
अच्युत : अविनाशी मयूर : मोरपंखी वाले भगवान
अद्भुत : निराला भगवान मोहन : चित्ताकर्षक
आदिदेव : देवताओं के देवता मुरली : बांसुरी बजाने वाले भगवान
आदित्य : अदिति के पुत्र मुरलीधर : बांसुरी रखने वाले
अजन्मा : जीवन और मृत्यु से परे मुरलीमनोहर : मनमोहक बांसुरी बजाने वाले
अजय : जिसे जीता न जा सके नन्दकुमार : नन्द के बेटे
अक्षर : जिसे नुकसान न किया जा सके नन्दगोपाल : नन्द के बेटे
अमृत : जिसे मारा न किया जा सके नारायण : हर किसी के लिए शरण
आनंद सागर : ख़ुशी का भंडार माखनचोर : मक्खन चुराने वाले
अनंत : जिसका कोई अंत न हो निरंजन : निष्कलंक
अनंतजीत : जिसने सब कुछ जीत लिया हो निर्गुण : जिसके गुण का बखान न किया जा सके
अन्य : जिससे ऊपर कोई न हो पदमहस्त : कमल जैसे हाथ वाले
अनिरुद्ध : जिसको बाधित न किया जा सके पदमनाभ : कमल जैसी नाभ वाले
अपराजीत : जिसको हराया न जा सके पारब्रह्म : सबसे बड़ा सत्य
अवयुक्त : जिसमें कोई बुराई न हो परमात्मा : सबसे बड़ी आत्मा
बालगोपाल : बालक कृष्ण परमपुरुष : सबसे बड़ा पुरुष
बालकृष्णा: बालक कृष्ण पार्थसारथि : अर्जुन के सारथि
चतुर्भुज : चार भुजाओं वाला प्रजापति : सभी जीव जंतु के रचियता
दानवेन्द्र : दान देने वाला भगवान पुण्य : पनीत, पवित्र
दयालु : कृपालु पुरषोत्तम : सबसे उत्तम पुरुष
दयानिधि : कृपा का सागर रविलोचन : सूर्य जिसकी आँखें हैं
देवादिदेव : देवताओं के देवता सहस्त्रअक्ष : हज़ार आँखों वाला
देवकीनंदन : देवकी माँ के पुत्र सहस्त्रजीत : हज़ारों पर विजय प्राप्त करने वाला
देवेश : देवताओं के देवता साक्षी : सबकुछ देखने वाला
धर्माध्यक्ष : धर्म के प्रमुख सनातन : अनन्त
द्रविन : जिसका कोई क्षत्रु न हो सर्वजन : सर्वज्ञ, सर्वदर्शी
द्वारकापति : द्वारका के स्वामी सर्वपालक : सभी का पालन पोषण करने वाला
गोपाल : ग्वालों के साथ खेलने वाला सर्वेश्वर : सबका ईश्वर
गोपालप्रिय : ग्वालों के प्रिय सत्यवाचन : सदा सत्य बोलने वाला
गोविंद : गौ को प्रसन्न करने वाला सत्यव्रत : जिसने सत्य का साथ देने का संकल्प लिया हो
ज्ञानेश्वर : ज्ञान का भगवन शान्तः : अमनपसंद
हरि : प्रकृति के भगवान श्रेष्ठ : उत्कृष्ट
हिरण्यगर्भ : शक्तिशाली रचनाकर्ता श्रीकांत : सुन्दर
ऋषिकेश : सभी बुद्धि के भगवान श्याम : सावले वर्ण वाला
जगद्गुरु : सारे जगत के गुरु श्यामसुन्दर : सावले वर्ण वाला सुन्दर
जगदीश : जगत के भगवान सुमेधा : बुद्धिमत्तापूर्ण
जगन्नाथ : जगत के भगवान सुरेशम : सभी देवताओं का स्वामी
जनार्दन : सभी को आशीर्वाद देने वाले स्वर्गपति : स्वर्ग का स्वामी
जयंत : सभी दुश्मनों के विजेता त्रिविक्रम : तीनो लोक का विजेता
ज्योतिरादित्य : सूर्य की चमक उपेन्द्र : इंद्र का बड़ा भाई
कमलनाथ : देवी लक्ष्मी के नाथ वैकुण्ठनाथ : वैकुण्ठ के स्वामी
कमलनयन : कमल जैसी आँखों वाले वर्धमान : निराकार भगवान
कंसंतक : कंस का वध करने वाले वासुदेव : वासुदेव के पुत्र
कंजलोचन : कमल जैसी आँखों वाले विष्णु : सभी प्रचलित भगवान
केशव : घने काले बालों वाले विश्वदक्षिणा : विश्व को दक्षिणा देने वाले
कृष्ण : सावले वर्ण वाला विश्वकर्मा : विश्व का रचियता
लक्ष्मीकांतम् : देवी लक्ष्मी के नाथ विश्वमूर्ती : विश्व की मूर्ति
लोकाध्यक्षा : तीनों लोक के स्वामी विश्वरूप : विश्व का रूप
मदन : प्यार के भगवान विश्वात्मा : विश्व की आत्मा
माधव : ज्ञान से भरा भंडार वृषपर्व : धर्म के भगवान
मधुसूदन : मधु दानव का नाश करने वाले यादवेन्द्र : यादवों के स्वामी
महेंद्र : इंद्र के भगवान योगी : योग करने वाला
मनमोहन : मंन को मोहने वाला योगीनामपति : योगियों के स्वामी

खाटू श्याम जी के प्रचलित नाम

shyam-baba बर्बरीक : खाटूश्याम जी का बचपन का नाम बर्बरीक था। पहले उनकी माँ और सभी सगे उन्हें इसी नाम से सम्बोधित करते थे।
cropped-8e4767abaafc4d9c054c5f5eb2acdfb8654028088353803666.jpg शीश के दानी : खाटूश्याम जी ने महाभारत की लड़ाई में अपने शीश का दान दिया था इसलिए उन्हें इस नाम से भी जाना जाता है।
khatu-shyamji हारे का सहारा: अपनी माता के कहे अनुसार इन्होने प्रण लिया था कि वे महाभारत की लड़ाई में हारे हुए कि तरफ से लड़ेंगें इसलिए इन्हें इस नाम से भी जाना जाता है।
5076ffa4799d51225445cc6fd31aef5d तीन बाण धारी : इन्हें भगवान् शिव से ३ बाण वरदान स्वरुप मिले थे,इसलिए इन्हें इस नाम से भी जाना जाता है।
f41af0758c51f829569d862fc28cebad लखदातार : खाटूश्याम जी अपने भक्तों को जब मांगे वो दे देते हैं, इसलिए इन्हें इस नाम से भी जाना जाता है।
c1ecaa3670a7260166e10d2bd4dcc6ee3456252833563458463.jpg लीला के अस्वार : खाटूश्याम जी के घोड़े का नाम लीला था, इसलिए इन्हें इस नाम से भी जाना जाता है। कुछ लोग इस घोड़े को नीला घोडा भी कहते हैं।

श्री खाटू श्याम कथा

home3

महाबली भीम के पुत्र घटोत्कच के विषय में हम सब जानते हैं । वीर घटोत्कच का विवाह दैत्यराज मुर की पुत्री मौरवी से हुआ । मौरवी को कामकंटका व आहिल्यावती के नामों से भी जाना जाता है । वीर घटोत्कच तथा महारानी मौरवी को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई । बालक के बाल बब्बर शेर की तरह होने के कारण इनका नाम बर्बरीक रखा गया । इन्हीं वीर बर्बरीक को आज दुनिया ‘ खाटू श्याम ‘ के नाम से जानती है ।

वीर बर्बरीक को बचपन में भगवान श्री कृष्ण द्वारा परोपकार करने एवं निर्बल का साथ देने की शिक्षा दी गयी । इन्होनें अपने पराक्रम से ऐसे अनेक असुरों का वध किया जो निर्बल ऋषि – मुनियों को हवन – यज्ञ आदि धार्मिक कार्य करने से रोकते थे । विजय नामक ब्राह्मण का शिष्य बनकर उनके यज्ञ को राक्षसों से बचाकर, उनका यज्ञ सम्पूर्ण करवाने पर भगवान शिव ने सम्मुख प्रकट होकर इन्हें तीन बाण प्रदान किये, जिनसे समस्त लोगों में विजय प्राप्त की जा सकती है।

जब महाभारत के युद्ध की घोषणा हुई तो वीर बर्बरीक ने भी अपनी माता के सम्मुख युद्ध में भाग लेने की इच्छा प्रकट की। माता ने इन्हें युद्ध में भाग लेने की आज्ञा इस वचन के साथ दी कि तुम युद्ध में हारने वाले पक्ष का साथ निभाओगे।

जब भगवान श्री कृष्ण जी को वीर बर्बरीक की इस शपथ का पता चला तो उन्होंने वीर बर्बरीक की परीक्षा लेने की सोची । जब वीर बर्बरीक युद्ध में भाग लेने चले तब भगवान श्री कृष्ण जी ने राह में इनसे भेंट की तथा वीर बर्बरीक से उनके तीन बाणों की विशेषता के बारे में पूछा । वीर बर्बरीक ने बताया कि पहला बाण समस्त शत्रुसेना को चिन्हित करता है, दूसरा तीर शत्रुसेना को नष्ट कर देता है तथा तीसरे बाण की आवश्कता आज तक नहीं हुई । भगवान श्री कृष्ण ने एक पेड़ की तरफ इशारा करते हुए कहा कि तुम इस स्थान को युद्धभूमि मानो तथा इस पेड़ के पत्तों को शत्रुसेना समझ कर अपनी युद्धकला को दिखाओ ।

इस बीच श्री कृष्ण जी ने वीर बर्बरीक की नजर बचाकर एक पत्ता पेड़ से तोड़कर अपने पैर के नीचे दबा लिया । वीर बर्बरीक द्वारा युद्धकला दिखाने के बाद श्री कृष्ण जी ने पूछा कि क्या तुम्हारे बाण ने सभी पत्तों को भेद दिया है ? वीर बर्बरीक के हाँ कहने पर श्री कृष्ण ने अपने पैर के नीचे दबे पत्ते को निकाला, उनकी हैरानी का कोई ठिकाना नहीं रहा जब उन्हें वह पत्ता भी बिंधा हुआ मिला ।

भगवान श्री कृष्ण जी को विश्वास हो गया कि वीर बर्बरीक के रहते युद्ध में पाण्डवों की विजय संभव नहीं थी । इसलिये वीर बर्बरीक से अपना शीश दान स्वरूप देने को कहा । वीर बर्बरीक अपना शीश सहर्ष देने को तैयार हो गये । वीर बर्बरीक ने भगवान श्री कृष्ण के सम्मुख महाभारत का युद्ध देखने की इच्छा प्रकट की । इस पर भगवान श्री कृष्ण ने प्रसन्न होकर दो वरदान दिये, पहला उनका शीश शरीर से अलग होकर भी हमेशा जीवित रहेगा व महाभारत युद्ध का साक्षी बनेगा और दूसरा यह कि कलियुग में तुम्हें (वीर बर्बरीक को) मेरे प्रिय नाम श्री श्याम के नाम से पूजा जायेगा । भगवान श्री कृष्ण जी ने वीर बर्बरीक के शीश को एक ऊँचे स्थान पर लाकर रख दिया । जहाँ से पूरी युद्ध भूमि दिखाई देती थी ।

महाभारत युद्ध की समाप्ति पर युधिष्ठर ने ब्रह्मसरोवर पर विजय स्तंभ की स्थापना की । पाण्डवों में इस बात पर बहस होने लगी कि महाभारत का युद्ध किस के कारण जीता गया ? जब पाण्डव आपस में बहस करने लगे तो उन्होंने श्री कृष्ण जी से इस संबंध में फैसला करवाने का निर्णय किया, भगवान श्री कृष्ण जी ने पाण्डवों से कहा कि इस बात का फैसला वीर बर्बरीक कर सकते हैं क्योंकि उन्होंने पूरा युद्ध एक साक्षी के रूप में देखा है ।

इस बात का फैसला करवाने हेतु श्री कृष्ण जी की आज्ञा पाकर पाण्डवों ने वीर बर्बरीक के शीश को लाकर विजय सतंभ (द्रोपदी कूप ब्रह्मसरोवर, कुरुक्षेत्र) पर स्थापित किया । पाण्डवों की बात सुनकर वीर बर्बरीक ने उत्तर दिया कि मुझे तो पूरी युद्ध भूमि में श्री कृष्ण का सुदर्शन चक्र तथा द्रोपदी का खप्पर दिकाई दिया अर्थात सभी वीर श्री कृष्ण के सुदर्शन चक्र से मारे गये तथा द्रोपदी (काली रूप में) ने खप्पर भर कर उन वीरों का रक्त पिया ।

महाभारत की समाप्ति पर यह शीश धरती में समा गया । भगवान श्री कृष्ण के वरदान अनुसार कलियुग में राजस्थान के खाटू नामक स्थान पर राजा को सपने में श्री कृष्ण जी ने दर्शन दिये तथा पावन शीश को निकाल कर उसे खाटू में प्रतिष्ठित करने की आज्ञा दी । आज वीर बर्बरीक के उसी पावन शीश की श्री खाटू श्याम के नाम से पूजा होती है ।

वह स्थान जहाँ श्री कृष्ण जी ने वीर बर्बरीक की परीक्षा ली थी, वर्तमान में हिसार के तलवंडी राणा के समीप बीड़ बर्बरान के नाम से प्रसिद्ध है । उस पेड़ जिसके पत्ते वीर बर्बरीक ने भेदे थे, आज भी बिंधे हुए होते हैं । वह स्थान जहाँ वीर बर्बरीक का शीश श्री कृष्ण द्वारा ऊँचे स्थान पर रखा गया था, वर्तमान में कैथल जिले के गाँव सिसला सिसमौर में है तथा वीर बर्बरीक की पूजा सिसला गॉंव में नगरखेड़ा बबरूभान के नाम से होती है, यह स्थान आज भी आस – पास के स्थान में बहुत ऊँचाई पर है ।

यह विजय स्तंभ जहाँ पाण्डवों द्वारा वीर बर्बरीक के शीश की स्थापना की गई थी वर्तमान में द्रोपदी कूप, कुरुक्षेत्र ब्रह्मसरोवर पर स्थित है । उस युग के वीर बर्बरीक आज कलियुग के श्याम है । इनके बारे में प्रसिद्ध है कि आज भी वे माता को दिये वचन के अनुसार इस संसार में हारने वाले इंसान का साथ देते हैं । इनका दरबार आज भी हारे का सहारा है ।

 

हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा

ॐ श्री श्याम देवाय: नम:

home4

जय श्री श्याम, श्री खाटू श्याम परिवार में आपका स्वागत है

श्री खाटू श्याम जी का नाम आज केवल भारत में ही नहीं अपितु दुनिया में फैले करोड़ों हिंदुस्तानी लोगों कि अटूट श्रद्धा और विश्वास का विषय है। अपने नाम के अनुरूप ‘श्री खाटू श्याम जी’ कलियुग के अवतार तथा अपने भक्तों की सम्पूर्ण मनोकामनाओ को पूर्ण करने वाले हैं।

श्री खाटू श्याम जी जिनको आज दुनिया ‘हारे का सहारा’, ‘शीश का दानी’ तथा ‘कलियुग का अवतारी’ आदि नामों से जानती है, उन्होंने अपने शीश का दान भगवान् श्री कृष्ण जी के कहने पर इसी कुरुक्षेत्र कि पावन भूमि पर दिया था। आज देश विदेश में इनके असंख्य भव्य मंदिर हैं लेकिन कुरुक्षेत्र जो विश्व में ‘मंदिरों का शहर’ नाम से प्रसिद्ध है, श्री श्याम प्रभु के भव्य मंदिर से वंचित है।

श्री खाटू श्याम परिवार  में श्री खाटू श्याम जी के मंदिर का संकल्प लिया है। श्री खाटू श्याम जी अपने नाम के अनुरूप इस संसार में हारने वाले इंसान का साथ देते हैं। इनकी शरण में आने वाला व्यक्ति सभी प्रकार के दुःख व कष्टों से मुक्ति पाता है।

श्री खाटू श्याम परिवार कुरुक्षेत्र आप सभी भक्तों से श्री खाटू श्याम जी के मंदिर के निर्माण में सहयोग कि अपील करता हैं तथा श्री खाटू श्याम जी से प्रार्थना करता है कि वे आपके जीवन को सुखमय एवं ईश्वरोन्मुखी बनाए।

आप सभी भक्तों के सुझाव सादर आमंत्रित हैं, आपके सुझाव भविष्य में इस वेबसाइट को अधिक आकर्षक बनाने में सहयोगी बनेंगें।

The Khatushyam Temple is a Hindu temple in the village of Khatushyamji, Rajasthan, India

Create your website at WordPress.com
Get started