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लोकप्रिय Khatu Shyam भजन “दर तेरे आने की, दर्शन तेरा पाने की”

दर तेरे आने की, दर्शन तेरा पाने की (तर्ज़ :स्वरचित )

दर तेरे आने की, दर्शन तेरा पाने की
दिल में तमन्ना है,तुझको रिझाने की!!
बिन महर तेरे,क्या दर कोइ आ पाता
आने की क्या है बात,चल नहीं पाता..
दर तेरे आने की, दर्शन तेरा पाने की
दिल में तमन्ना है,तुझको रिझाने की!!
नहीं मीरा सी भक्ति,नहीं भाव सुदामा सा
नहीं करमा मैं कोइ,नहीं हूँ मैं नरसी सा..
दर तेरे आने की, दर्शन तेरा पाने की
दिल में तमन्ना है,तुझको रिझाने की!!
कब होगी महर तेरी,कब नज़र तुम्हारी श्याम
दे भक्ति भाव मुझमे,आऊं मैं दर तेरे धाम…
दर तेरे आने की, दर्शन तेरा पाने की
दिल में तमन्ना है,तुझको रिझाने की!!
क्या पाप किये मैंने,क्या भूल हुई है श्याम
पापी कितने तारे, ‘टीकम’ तो तेरा गुलाम..
दर तेरे आने की, दर्शन तेरा पाने की
दिल में तमन्ना है,तुझको रिझाने की!
जय हो मेरे श्याम सांवरिया की

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मां दुर्गा की पूजा तो मिलेगा पूरे नौ दिनों का फल

कैसे मिलेगा फल नौ दिनों का

नवरात्रि विदा होने जा रही हैं, इन दोनों में भक्तों ने अपने अपने तरीके से माता को प्रसन्न करने की कोशिश की और क्षमता के अनुसार पूजन किया। लेकिन कई भक्त ऐसे भी होंगे जो इस नवरात्रि में माता की विशेष पूजा करने से वंचित रह गए होंगे। अगर आप भी उनमें से एक हैं तो हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसी पूजा विधि जो न सिर्फ नवरात्रि में करने से विशेष फल देती है, बल्कि मां दुर्गा को भी अत्यंत प्रिय है। 


वैसे तो मां दुर्गा की कृपा अपने भक्तों पर पूरे साल ही बनी रहती है, पर नवरात्रों के ये नौ दिन विशेष फलदायी माने जाते हैं, क्योंकि इन नौ दिनों में मां दुर्गा अपने भक्तों के बीच पृथ्वी पर आकर निवास करती है। जिससे भक्तों के साथ मां दुर्गा का संबंध सीधे जुड़ जाता है और इस दौरान मां की पूजा और भक्ति का फल जल्दी प्राप्त होता है।


कहा जाता है कि माता अपने भक्तों को किसी भी तरह से दुखी नहीं देख सकती है। उनका आशीर्वाद भी इस तरह मिलता है, जिससे साधक को किसी अन्य की सहायता की आवश्यकता नहीं पड़ती है। यही वजह है कि मां दुर्गा की प्रसन्नता के लिए कभी भी उनकी उपासना की जा सकती है। चंडी हवन के लिए किसी भी मुहूर्त की अनिवार्यता नहीं है। नवरात्रि में इस आराधना का विशेष महत्व है। इस समय के तप का फल कई गुनाव शीघ्र मिलता है।

नवरात्रि में मां दुर्गा के देवी सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए। देवी सहस्त्रनाम में देवी के एक हजार नामों की सूची है। इसमें उनके गुण हैं व कार्य के अनुसार नाम दिए गए हैं। सहस्त्रनाम के पाठ करने का फल भी महत्वपूर्ण है। देवी सहस्त्रनाम का पाठ करते हुए इन नामों से हवन करने का भी विधान है। इसके अंतर्गत नाम के पश्चात नमः लगाकर स्वाहा लगाया जाता है।
सहस्त्रार्चन देता है अभूतपूर्व फलसर्व कल्याण व कामना पूर्ति हेतु इन नामों से अर्चन करने का प्रयोग अत्यधिक प्रभावशाली है। जिसे सहस्त्रार्चन के नाम से जाना जाता है। इस नामावली के एक-एक नाम का उच्चारण करके देवी की प्रतिमा पर, उनके चित्र पर, उनके यंत्र पर या देवी का आह्वान किसी सुपारी पर करके प्रत्येक नाम के उच्चारण के पश्चात नमः बोलकर भी देवी की प्रिय वस्तु चढ़ाना चाहिए। जिस वस्तु से अर्चन करना हो वह शुद्ध, पवित्र, दोष रहित व एक हजार होना चाहिए।

अर्चन में बिल्वपत्र, हल्दी, केसर या कुंकुम से रंग चावल, इलायची, लौंग, काजू, पिस्ता, बादाम, गुलाब के फूल की पंखुड़ी, मोगरे का फूल, चारौली, किसमिस, सिक्का आदि का प्रयोग शुभ व देवी को प्रिय है।  यदि अर्चन एक से अधिक व्यक्ति एक साथ करें तो नाम का उच्चारण एक व्यक्ति को तथा अन्य व्यक्तियों को नमः का उच्चारण अवश्य करना चाहिए।  
अर्चन की सामग्री प्रत्येक नाम के पश्चात, प्रत्येक व्यक्ति को अर्पित करना चाहिए। अर्चन के पूर्व पुष्प, धूप, दीपक व नैवेद्य लगाना चाहिए। दीपक इस तरह होना चाहिए कि पूरी अर्चन प्रक्रिया तक प्रज्वलित रहे। अर्चनकर्ता को स्नानादि आदि से शुद्ध होकर धुले कपड़े पहनकर मौन रहकर अर्चन करना चाहिए। इस साधना काल में आसन पर बैठना चाहिए तथा पूर्ण होने के पूर्व उसका त्याग किसी भी स्थिति में नहीं करना चाहिए।
अर्चन के उपयोग में प्रयुक्त सामग्री अर्चन उपरांत किसी साधन, ब्राह्मण, मंदिर में देना चाहिए। कुंकुम से भी अर्चन किए जा सकते हैं। इसमें नमः के पश्चात बहुत थोड़ा कुंकुम देवी पर अनामिका-मध्यमा व अंगूठे का उपयोग करके चुटकी से चढ़ाना चाहिए।  
बाद में उस कुंकुम से स्वयं को या मित्र भक्तों को तिलक के लिए प्रसाद के रूप में दे सकते हैं। सहस्त्रार्चन नवरात्र काल में एक बार कम से कम अवश्य करना चाहिए। इस अर्चन में आपकी आराध्य देवी का अर्चन अधिक लाभकारी है।