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श्री खाटू श्याम जी भजन Khatu Shyam Ji Bhajan Lyrics Hindi खाटू श्याम जी भजन | श्याम बाबा भजन | खाटू श्याम लिरिक्स हिन्दी

ओ सांवरे तेरी दुनिया दीवानी है
o sanware teri duniya diwani hai
श्री खाटू श्याम जी भजन Khatu Shyam Ji Bhajan Lyrics Hindi
खाटू श्याम जी भजन | श्याम बाबा भजन | खाटू श्याम लिरिक्स हिन्दी

खाटू वाले श्याम धनी तेरी अज़ाब कहानी है,
ओ सांवरे तेरी दुनिया दीवानी है,

मोर छड़ी तो तेरी करती कमला है,
जो भी तू करता बाबा होता बेमिसाल है,
भगतो के तू दिल में रहता दिलबर जनि है,
ओ सांवरे तेरी दुनिया दीवानी है,

हारे के सहारे बाबा तुम रखवाले हो,
पल में ही मान जाते बड़े भोले भाले हो,
तुमसे बड़ा न कोई दुनिया में कोई भी दानी है,
ओ सांवरे तेरी दुनिया दीवानी है,

बड़ी प्यारी लगती तेरी नीले की सवारी है,
मुस्कान तेरी बाबा बड़ी प्यारी प्यारी है,
मोटे मोटे नैन तेरे ये सुरमे दानी है,
ओ सांवरे तेरी दुनिया दीवानी है,

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भक्तों के हर दुःख दर्द दूर करते हैं श्री खाटू श्याम जी : श्री श्याम बाबा को खाटू नरेश भी कहा जाता है और अपने भक्तों के हर दुःख दर्द दूर करते हैं। श्री श्याम बाबा सीकर जिले के खाटू नगर में विराजमान है। श्री खाटू श्याम बाबा को श्री कृष्ण जी से आशीर्वाद प्राप्त था की वे कलयुग में कृष्ण जी के अवतार के रूप में पूजे जाएंगे और इनकी शरण में आने वाले की हर पीड़ा को स्वंय भगवान् श्री कृष्ण हर लेंगे। श्री खाटू श्याम जी के मुख मंदिर के अलावा दर्शनीय स्थलों में श्री श्याम कुंड और श्याम बगीची भी हैं जो मंदिर परिसर के पास में ही स्थित हैं।

 श्री खाटू श्याम जी को हारे का सहारा कहा जाता है। खाटू श्याम जी कथा का उल्लेख महाभारत की कथा में आता है। खाटू श्याम जी का नाम बर्बरीक था और वे घटोत्कच के पुत्र थे। इनकी माता का नाम नाग कन्या मौरवी था। जन्म के समय बर्बरीक का शरीर मानो किसी बब्बर शेर के सामान विशाल काय था इसलिए निका नामकरण बर्बरीक कर दिया गया। बर्बरीक बाल्यकाल से ही शारीरिक शक्ति से भरे थे और शिव के महान भक्त थे। श्री शिव ने ही बर्बरीक की तपस्या से प्रशन्न होकर इन्हे ३ चमत्कारिक शक्तियां आशीर्वाद स्वरुप दी थी। ये तीन शक्तियां उनके बाण ही थे जो स्वंय श्री शिव ने उन्हें दिए थे। उनका दिव्य धनुष भगवान् अग्नि देव के द्वारा दिया गया था। कौरव पांडवो के युद्ध में बर्बरीक ने अपनी माँ का आशीर्वाद लेकर हारने वाले पक्ष की और से लड़ने तय किया जिसके कारन उन्हें हारे का हरीनाम से जाना जाता है। महाभारत युद्ध में उन्होंने हारने वाले पक्ष का साथ देने का निर्णय किया। जब श्री कृष्ण जी को इसके बारे में पता चला तो उन्होंने जान लिया की यदि बर्बरीक कौरवों के पक्ष में हो जाएंगे तो युद्ध का परिणाम बदल जाएगा। श्री कृष्ण ने मार्ग में ब्राह्मण का रूप धारण करके उनकी परीक्षा लेनी चाही। श्री कृष्ण ने बर्बरीक से कहा की वो अपने तीरों की परीक्षा देकर दिखाए और एक तीर से पेड़ के सारे पत्ते भेद करके दिखाए। इस पर बर्बरीक ने ईश्वर का ध्यान करके तीर चलाया। तीर पीपल वृक्ष के सारे पत्तों को भेदता हुआ श्री कृष्ण के पैरों के चारों और चक्कर लगाने लग गया। श्री कृष्ण ने एक पत्ता अपने पैरों के निचे दबा रखा था। बर्बरीक को यह जानते हुए देर नहीं लगी की ये ब्राह्मण नहीं बल्कि श्री कृष्ण हैं। श्री कृष्ण जी ने युक्तिवश उनके दिव्य तीरों को खारिज करते हुए उनसे उनका शीश दान में मांग लिया।

वीर बर्बरीक ने ख़ुशी पूर्वक प्रभु के चरणों में अपना शीश दान में दे दिया तब श्री कृष्ण ने बर्बरीक को आशीर्वाद दिया की कलयुग में उन्हें श्री श्याम बाबा के नाम से घर घर पूजा जाएगा और उनकी शरण में आने वाले भक्तों के दुःख दर्द स्वंय श्री कृष्ण दूर करेंगे।

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वर्तमान में जहाँ मंदिर है उसकी स्थापना तो बहुत पूर्व में की गयी थी लेकिन उसे नए रूप में १७२० में इसकी आधारशिला राखी गयी थी। औरंगजेब ने इस मंदिर पर आक्रमण किया था और इसे नष्ट करने की कोशिश की जिसे रोकने के लिए हजारों राजपूतों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया।

फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष में यहाँ विशाल मेले का आयोजन होता है जहाँ देश विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन करने के लये आते हैं। मेले के लिए श्याम कमेटि के द्वारा व्यवस्थाएं की जाती है और स्थानीय प्रशाशन भी इसमें सहयोग करता है।  

देश विदेश से आते हैं भक्त : श्री खाटू धाम में देश विदेश से भक्त धोक के लिए आते यहीं और अपनी मन्नत बाबा से मांगते है। बाबा भक्तों की हर मुराद को पूरा करते हैं और आशीर्वाद देते हैं। बाबा हारे का सहारा है और शीश दानी के रूप में पूरा संसार पूजता है। शीश दान के कारन ही पूरा संसार बाबा को दानी समझता है। होली से पहले एकादशी को खाटू धाम में देश विदेश के भक्तों का जमावड़ा लग जाता है। यह मेला फाल्गुन माह के शुक्ल ग्यारस को ५ दिनों तक मेला भरता है। ज्यादातर भक्त तो मेले के बाद चले जाते हैं लेकिन कुछ भक्त होली तक यही रुकते हैं और खाटू में ही होली खेलकर जाते हैं।  रुकने के लिए यहाँ विभिन्न समाजों की तरफ से धर्मशालाएं हैं और किफायती दरों पर रुकने की व्यवस्था हैं। लोग अपने घरों से ही बाबा का झंडा जिसे निशान कहते हैं लेकर आते है। कुछ अपने साधनों से आते हैं और ज्यादातर बसों में और पैदल आते हैं। पैदल यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है।  

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इस मेले को लक्खी मेला भी कहा जाता है। इस मेले में स्थानीय लोग लंगर लगाते हैं और पैदल आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा करके बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। जयपुर और सीकर के राष्ट्रिय राजमार्ग और छोटी सड़कों पर लोग लंगर लगाते हैं। मेले का मुख्य द्वार रींगस में लगता है जहाँ से दस से बारह किलोमीटर पैदल चलकर श्रद्धालु बाबा के दरबार तक पहुँचते हैं। 

श्री खाटू शाम बाबा के दरबार में दर्शनीय स्थल : श्री खाटू श्याम बाबा के दरबार में मुख्य मंदिर में दर्शन के अलावा अन्य दर्शनीय स्थल भी है जिनके दर्शन किये जाने चाहिए। श्याम कुंड : श्याम कुंड के बारे में मान्यता है की जहां बाबा का शीश जिस धरा पर अवतरित हुआ था उस स्थान को श्याम कुंड के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है की श्याम कुंड में यदि कोई भक्त सच्चे मन से डुबकी लगाता है तो उसके सारे पाप कट जाते हैं और बाबा का आशीर्वाद उसे प्राप्त होता है। श्याम कुंड दो भागों में विभक्त है,  महिला और पुरुष। ऐसी मान्यता है की श्री श्याम कुंड प्राचीन समय में रेत का टीला हुआ करता था। उस टीले के आस पास इदा जाट की गायें चरने के लिए आया करती थी। टीले के ऊपर के आक का पौधा भी था। टीले के पास आते ही गायें स्वतः ही दूध देने लग जाती थी। इदा जाट रोज इस प्रक्रिया को देखता था। उसे इस बात का आश्चर्य हुआ की गायें उस स्थान पर जाते ही कैसे दूध देने लगती हैं। रात को इडा जाट को स्वप्न में दिखाई दिया की वहां दूध पीने वाला कोई और नहीं श्री श्याम ही हैं। श्री श्याम ने उससे कहा की राजा से कह कर उस स्थान की खुदाई करवाओ तुम्हे उस स्थान पर में मिलूंगा जो कलयुग में श्याम बाबा के नाम से पुकारे जाएंगे। अगले रोज राजा के कहने पर उस स्थान की मिटटी को हटाया गया और वहां पर श्री श्याम बाबा की मूर्ति टीले से निकाली गयी। आज  मूर्ति की पूजा होती है और वहां जो कुंड बनाया गया उस कुंड को श्याम कुंड के नाम से पुकारा जाता है। श्याम बगीची
खाटू श्याम जी मंदिर द्वार खुलने का समय
गर्मियों में खाटू श्याम जी मंदिर सुबह 4:30 बजे खुलता है और दोपहर 1:00 तक खुला रहता है। गर्मियों में शाम को 5:00 बजे मंदिर के पैट दुबारा खोले जाते हैं और रात्रि 10:00 बजे बंद कर दिए जाते हैं । सर्दियों में समय प्रात: के 6:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे और सांय 4:00 बजे से रात्रि 9 बजे तक का रहता है।

खाटूश्यामजी की आरती का समय:

आरती शीतकाल ग्रीष्मकाल
मंगला आरती प्रात: 5.30 बजे प्रात: 4.30 बजे
श्रृंगार आरती प्रात: 8.00 बजे प्रात: 7.00 बजे
भोग आरती दोहपर 12.30 बजे दोपहर 12.30 बजे
संध्या आरती सांय 6.30 बजे सांय 7.30 बजे
शयन आरती रात्रि 9.00 बजे रात्रि 10.00 बजे

श्याम मंदिर खुलने का समय:

खुलने का समय बंद करने का समय
शीतकाल ( प्रात:) प्रात: 5.30 बजे दोपहर: 1.30 बजे
शीतकाल (दोपहर) सांय 4.30 बजे रात्रि 9:30 बजे
ग्रीष्मकाल( प्रात:) प्रात: 4.30 बजे दोपहर: 1.30 बजे
ग्रीष्मकाल (दोपहर) सांय 4.30 बजे रात्रि 10.00 बजे

क्यों कहते हैं श्री खाटू श्याम को “हारे का सहारा” : श्री खाटू श्याम जी को हारे का सहारा कहा जाता है। इसके पीछे एक कहानी है। जब महाभारत युद्ध हो रहा था तब श्री बर्बरीक ने हारने वाले पक्ष की और से युद्ध में शामिल होने का निर्णय लिया। जब श्री कृष्ण को इसके बारे में पता चला तो उन्हें ये आभाष हो गया की यदि वीर बर्बरीक कौरवों के तरफ हो गए तो युद्ध का परिणाम बदल जायेगा।
श्री कृष्ण ने युक्तिवश वीर बर्बरीक के तीरों को व्यर्थ में ही जाया कर दिया और उनसे उनका शीश दान में मांग लिया। वीर बर्बरीक ने खुशीपूर्वक अपना शीश श्री कृष्णा के चरणों में दान स्वरुप रख दिया। श्री कृष्ण जी ने बर्बरीक की इस भक्ति से प्रसन्न होकर वरदान दिया की कलयुग में बर्बरीक को श्री श्याम के नाम से घर घर में पूजा जाएगा और जो भी भक्त उनकी शरण में आएगा उसके दुःख दर्द स्वंय श्री कृष्ण दूर करेंगे। 
श्री खाटू नगरी में श्याम बाबा का दरबार सजा है। दूर दूर ले भक्त श्री श्याम बाबा की शरण में आते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। महाभारत के युद्ध में हारने वाले पक्ष की और से लड़ने के निर्णय के कारन ही श्री श्याम बाबा को “हारे का सहारा” के नाम से जाना जाता है जो की पुरे विश्व में विख्यात है। 
हर वर्ष होली के अवसर पर यहाँ मेला लगता है जहाँ पर देश के दूर दराज के क्षेत्रों से लोग बाबा के दरबार में आते हैं और अपनी मन्नत मांगते हैं। यहाँ पर लोग लंगर लगाते है और श्रद्धालुओं की सेवा करते हैं, क्योंकी मान्यता है की यहां पर सेवा करने से श्याम बाबा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पैदल श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक होती है जिनके लिए मार्ग में भंडारा और विश्राम की व्यवस्था श्याम बाबा के श्रद्धालु करते हैं।

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श्री श्याम कुंड के अलावा श्री श्याम बगीची भी प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक हैं। श्री श्याम बगीची मुख्य मंदिर के दायी और स्थित है जहा पर उनके परम भक्त आलू सिंह जी की प्रतिमा भी लगी हुयी है। आलू सिंह जी राजपूत परिवार से थे और बाबा श्याम के परम भक्त थे।  वे सुबह सुबह निकलते और आस पास के क्षेत्रों से पुष्प इकठ्ठा करके बाबा श्याम का श्रृंगार करते तथा पुरे दिन बाबा के भजन करते थे।  आज भी आलू सिंह जी के वंशज ही मंदिर में पूजा का कार्य करते हैं। श्याम बगीची में सुन्दर फूलों के पौधे और वृक्ष लगे हुए हैं जिनका दृश्य काफी मनोरम है। श्री श्याम बगीची से ही नित्य फूलों को लाकर श्री श्याम बाबा का श्रृंगार किया जाता है।कैसे पहुंचे श्री श्याम बाबा के दरबार में : श्री खाटू शाम जी मंदिर सीकर जिले के रींगस के पास खाटू नगरी में स्थापित है।
सड़क मार्ग : जयपुर और सीकर से श्री खाटू धाम के लिए निजी और राजस्थान राज्य परिवहन निगम की बसों के साथ ही टैक्सी और जीपें भी यहां आसानी से उपलब्ध हैं। रेलमार्ग : निकटतम रेलवे स्टेशन रींगस जंक्शन 15 किलोमीटर की दुरी पर है। रेल मंत्रालय के द्वारा रींगस रेलवे स्टेशन को विकसित किया जा रहा है। ब्रॉड गेज का कार्य पूर्ण हो चूका है और इस पर जयपुर से सीकर के लिए रेल शुरू कर दी गयी हैं जिनका स्टॉपेज रींगस में भी है। दिल्ली से भी रींगस को जोड़ने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
वायुमार्ग :श्री खाटू श्याम जी के दरबार में आने के लिए नजदीकी हवाई मार्ग जयपुर है जो खाटू से 80
किलोमीटर की दूरी पर स्थापित है। जयपुर से रींगस और खाटू श्याम जी के लिए काफी बसें चलती है। रींगस से खाटू श्याम जी के लिए भी यातायात की अच्छी व्यवस्था है।

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