Posted in आरती, खाटू धाम, खाटू नरेश, जय श्री श्याम, फाल्गुन मेला खाटू श्याम जी, श्याम बाबा, श्री खाटू श्याम जी, श्री खाटू श्याम जी मंदिर Information, Jai Shree Shayam, Shayam baba story, Shayam bhajan

खाटू श्याम जी में मुख्य मेला

khatu shyam ji falgun mela
khatu shyam ji falgun mela

फाल्गुन मेला खाटू श्याम जी का मुख्य मेला है और यह मेला ५ दिन के लिए भरा जाता है . यह फाल्गुन माह (फरवरी/मार्च ) में तिथ के आधार पर भरता है . फाल्गुन माह की शुकल ग्यारस को मुख्य दिन होता है मेले का . फाल्गुन मेला अष्टमी से बारस तक ५ दिन के लिए भरता है . यह मेला होली त्यौहार से ५ दिन पहले भरा जाता है . लाखो भक्त दुनिया के कोने कोने से मेले में श्याम बाबा के दर्शन करने अपने परिवार और मित्रो के साथ आते है . बहूत सारे भक्त तो होली तक ही रूककर श्याम बाबा के साथ होली का त्यौहार मनाते है .
खाटू धाम में बहूत सारी धर्मसालाये भक्तो के रखने की व्यवस्ता करती है . देश भर से श्याम भजन गायक आते है और हर धर्म साला में संद्या समय श्याम बाबा की ज्योत जगा कर सत्संग कीर्तन किये जाते है . खाटू धाम और आस पास की जगह श्याम बाबा के जयकारो से गूंज उटती है . बहूत ही धार्मिक दर्श होता है इन दिनों खाटू धाम का .
इस मेले में निशान यात्रा का भी बहूत बड़ा महत्व है . निशान बाबा श्याम को समर्प्रित झंडा होता है , जिसे श्याम भक्त बाबा को भेट करने पेडल ही रिंग्स से या फिर अपने निवास से साथ लाते है . निशान प्रतिक है श्याम बाबा के इस जगत जीत का . श्याम बाबा तीन बाण धारी थे , और जगत विजेता ही थे . केसरिया निशान उनके शीश के बलिदान की याद में श्याम बाबा को चदाया जाता है .
ज्यादातर भक्त खाटू धाम से 19 km दूर रिंग्स से श्री श्याम बाबा के लिए पेडल यात्रा करते है . रिंग्स में नहा कर निशान की पूजा करके वे अपने यात्रा शुरू करते है .
रिंग्स से खाटू धाम यात्रा के बीच जगह जगह सेवा मंडल श्याम भक्तो के लिए छोटे चिकित्सालय , खाने पिने की व्यवस्ता , रहने की व्यवस्ता करते है . यह अलग ही दुनिया होती है जहा हर तरफ श्याम बाबा के जयकारे की गूंज , निशान ही निशान और श्याम भक्त दिखाई देते है .
बहूत सारे भक्त डी.जे पर डांस करते करते श्याम बाबा की खाटू धाम पहुचते है .
इन पांच दिनों में 30 लख भक्त श्याम बाबा के दर्शन करने आते है . इतने भक्तो की सुविधा के लिए प्रशासन अच्छे से व्यवस्ता करता है . सुरक्षा व्यवस्ता बहूत अच्छी की जाती है .
बोलिए खाटू वाले हम्हे बुलाले इक बार खाटू धाम , भरोशा तेरा है .

अन्य उत्सव :
खाटू श्याम जन्मोत्सव :
कृष्णा जन्मोत्सव
झूल झूलनी एकादस्मी
होली
वसंत पंचमी

Posted in आरती, खाटू नरेश, जय श्री श्याम, श्याम बाबा, Jai Shree Shayam, Shayam baba story

खाटू श्याम जी कथा कहानी

!! शीश के दानी श्री श्याम बाबा का संक्षिप्त जीवन परिचय !!

श्री खाटू श्याम जी श्याम बाबा अर्थात वीर बर्बरीक का द्वापर युग में परिचय 

श्री खाटू श्याम जी श्याम बाबा की हिंदी कथा कहानी इस प्रकार है .

खाटू श्याम मोर्विनंदन बर्बरीक

द्वापर के अंतिम चरण में हस्तिनापुर में कौरव एवम पांडव राज्य करते थे, पाण्डवों के वनवासकाल में भीम का विवाह हिडिम्बा के साथ हुआ… उसके एक पुत्र हुआ, जिसका नाम घटोत्कच रखा गया… पाण्डवों का राज्याभिषेक होने पर घटोत्कच का कामकटंकटा के साथ विवाह और उससे बर्बरीक का जन्म हुआ.. उसने भगवती जगदम्बा से अजेय होने का वरदान प्राप्त किया…

जब महाभारत युद्ध की रणभेरी बजी, तब वीर बर्बरीक युद्ध देखने की इच्छा से कुरु क्षेत्र की और प्रस्थान किया, मार्ग में विप्र रूप धारी श्री कृष्णा से साक्षात्कार हुआ.. विप्र के पूछने पर उसने अपने आप को योद्धा व दानी बताया.. परीक्षा स्वरुप उसने पेड़ के प्रत्येक पत्ते को एक ही बाण से बेंध दिया तथा श्री कृष्ण के पैर के नीचे वाले पत्ते को भी बेंधकर वह बाण वापस तरकस में चला गए… विप्र वेशधारी श्री कृष्ण के पूछने पर उसने कहा कि मैं हारने वाले पक्ष में लडूंगा..श्री कृष्ण ने कहा कि अगर तुम महादानी हो तो अपना शीश समर भूमि की बलि हेतु दान में दे दो… ततपश्चात् श्री कृष्ण के द्वारा अपना असली परिचय दिए जाने के बाद उसने महाभारत युद्ध देखने कि इच्छा प्रकट की… रात भर भजन पूजन कर प्रातः फाल्गुन शुक्ला द्वादशी को स्नान पूजा आदि करके, अपने हाथ से अपना शीशश्री कृष्ण को दान कर दिया… श्री कृष्ण ने उस शीश को युद्ध अवलोकन के लिए, एक ऊँचे स्थान पर स्थापित कर दिया…

खाटू श्याम मोर्विनंदन बर्बरीक


युद्ध में विजय श्री प्राप्त होने पर पांडव विजय के श्रेय के सम्बन्ध में वाद-विवाद करने लगे… तब श्रीकृष्ण ने कहा की इसका निर्णय बर्बरीक का शीश कर सकता है… शीश ने बताया कि युद्ध में श्री कृष्ण का सुदर्शन चक्र चल रहा था और द्रौपदी महाकाली के रूप में रक्त पान कर रही थी.. श्री कृष्ण ने प्रसन्न होकर शीश को वरदान दिया कि कलयुग में तुम मेरे श्याम नाम से पूजित होगे तुम्हारे स्मरण मात्र से ही भक्तों का कल्याण होगा और धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष कि प्राप्ति होगी… स्वप्न दर्शनोंपरांत बाबा श्याम, खाटू धाम में स्थित -श्याम कुण्ड से प्रकट होकर अपने कृष्ण विराट सालिग्राम श्री श्याम रूप में सम्वत १७७७ में निर्मित वर्तमान खाटू श्याम जी मंदिर में भक्तों कि मनोकामनाए पूर्ण कर रहे है

Posted in खाटू नरेश, जय श्री श्याम, श्याम बाबा, Jai Shree Shayam, Shayam bhajan

खाटू श्याम जी ( श्याम बाबा ) के प्रसिद्ध मुख्य नाम और जयकारे

khatu shyam ji names title=

वीर बर्बरीक ने जब भगवान श्री कृष्णा को अपना शीश दान में दिया तब इस बलिदान के लिए भगवान श्री कृष्णा ने वीर बर्बरीक के शीश को अमरत्व का वरदान दे कर उन्हें अपने नाम “श्याम ” से कलीकल (कलियुग) में घर घर पूजित होने का वरदान दे दिया . कलिवुग में बर्बरीक जी का शीश खट्वा नगरी (खाटू धाम ) से धरा से अवतरित हुआ . अत: इन्हे खाटू श्याम जी के नाम से पूजा जाता है

2) मोर्विनंदन श्याम ::

महर्षि वेद व्यास जी जिन्होंने महाभारत की रचना की थी , उन्ही के द्वारा लिखी गयी स्कन्द्पुराण में बताया गया है की वीर बर्बरीक की माता मोर्वी (कामनकंता ) और पिताश्री महाबली भीम थे
अत: माँ मोर्वी के लाल को मोर्विनंदन श्री श्याम से भी पुकारा जाता है .

3) शीश के दानी ::

शीश दान करने के बाद इन्हे शीश के दानी के नाम से भी जाना जाता है .

khatu shyam ji names title=

४) लखदातार :

Luck – भाग्य  दातार -देने वाला अत: भाग्य को चमकाने वाला खाटू श्याम हमारा | भरपूर देने वाला |  खाली झोली भरने  वाला भाग्य जाने वाला .

५) लीले का अश्वार :

बर्बरीक के नीले घोड़े जिसका नाम था लीला उनपे सवार होने के कारण इनके लीले का अश्वार भी कहा जाता है.

६) तीन बाण धारी :

वीर बर्बरीक जी के पास 3 ऐशे बाण थे जिस से वो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को जीत सकते थे . इसमे कोई शंका नही की उन जेसा धनुर्धर न हुआ था न ही कोई होगा . श्री कृष्णा ने इसी वजह से उनका शीश दान में लेकर उन्हें युद्ध से वंचित रख दिया था .

7 ) हारे का सहारा :

खाटू श्याम जी कलियुग देव को हारे के सहारे के नाम से भी जाना जाता है क्योकि जब भक्त हर दर पर अपने आप को खाली हाथ पाता है तब खाटू श्याम जी मंदिर में उसकी पुकार सुनी जाता है
और भक्त यही गुनगुनाता है .
मैं भी जग से हार के आया , थाम ले मेरा हाथ

८) खाटू नाथ की जय

९) कलियुग देव की जय

१०) शीश देव की जय

११) खाटू नरेश

 इनके अलावा कलियुग के अवतार की जय बोलना और कृष्ण के अवतार की जय बोलना सरासर गलत है |

ऐसा क्यों पढ़े : क्यों नही है श्याम बाबा कलियुग के अवतार

यह लेख भी आपको जरुर पसंद आयेंगे

खाटू श्याम मंदिर पाकिस्तान

खाटू श्याम की शीश दान की कथा कहानी

महान श्याम भक्त जिनके नाम अमर हुए

खाटू श्याम बाबा की आरती

खाटू श्याम जी में दर्शनीय स्थल